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रोगी कल्याण समिति (RKS) क्या है? कार्य, लाभ और महत्व

 रोगी कल्याण समिति (Rogi Kalyan Samiti – RKS)

“जब अस्पताल सिर्फ इलाज का नहीं, सेवा का मंदिर बन जाए – वहाँ रोगी कल्याण समिति होती है”


क्या आप जानते हैं?
अस्पतालों में सफाई, दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टरों की उपस्थिति, मरीजों के लिए पानी, बैठने की व्यवस्था, बायोमेडिकल वेस्ट…
इन सब चीज़ों को कौन देखता है?

यही जिम्मेदारी संभालती है –
रोगी कल्याण समिति (RKS)
अस्पताल में आने वाले हर मरीज के अनुभव को बेहतर बनाने की एक सशक्त पहल।


रोगी कल्याण समिति क्या है?

रोगी कल्याण समिति एक स्थानीय स्तर की निगरानी और प्रबंधन समिति होती है,
जो हर सरकारी अस्पताल, PHC, CHC, जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में बनाई जाती है।

इस समिति में होते हैं:

  • डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ

  • स्थानीय नागरिक, समाजसेवी

  • पंचायत/नगरपालिका के प्रतिनिधि

  • NGO या महिला मंडल की सदस्य

  • और कभी-कभी खुद मरीज के परिवारों की राय भी ली जाती है

यह समिति मिलकर तय करती है कि:

“हमारा अस्पताल केवल इलाज का केंद्र नहीं, मरीज का घर जैसा हो।”


रोगी कल्याण समिति का उद्देश्य:

🔹 मरीजों को साफ, सुरक्षित और सम्मानजनक इलाज मिलना
🔹 अस्पताल का पारदर्शी संचालन
🔹 स्थानीय जरूरतों के अनुसार सुधार लाना
🔹 जनता और अस्पताल के बीच सेतु बनना
🔹 छोटे-छोटे फंड से जरूरी काम तुरंत करना


समिति क्या-क्या करती है?

कार्य विवरण
सफाई व्यवस्था अस्पताल परिसर, टॉयलेट, वार्ड में स्वच्छता सुनिश्चित करना
दवा की उपलब्धता दवाइयाँ समय पर मरीज को मिलें, इसकी निगरानी
सुविधाएं मरीजों के बैठने, पीने का पानी, पंखे, कूलर, बेड की व्यवस्था
शिकायत समाधान अगर किसी मरीज को तकलीफ है, तो उसकी सुनवाई और समाधान
जनभागीदारी स्थानीय लोगों की भागीदारी और फीडबैक
स्थानीय फंड किसी जरूरी मरम्मत या खरीदारी में तुरंत सहायता

🎗️ "ये समिति सरकारी फंड का सही उपयोग करती है – मरीज की भलाई में।"


रोगी कल्याण समिति का मानव स्पर्श

यह समिति सिर्फ रिपोर्ट और बैठक नहीं करती —
बल्कि अस्पताल के दरवाजे से लेकर डॉक्टर के कमरे तक, मरीज के लिए सम्मान और सुविधा सुनिश्चित करती है।

👩‍🦳 “हमारे PHC में पहले कुर्सी नहीं थी, गर्मी में मरीज खड़े रहते थे। RKS ने तुरंत पंखे और कुर्सियां लगवाईं।”
— रेखा शर्मा, पंचायत सदस्य

👨‍⚕️ “कभी डॉक्टर कम हों, दवाएं खत्म हों – तो RKS के जरिए जनता की आवाज़ तुरंत ऊपर तक पहुंचती है।”
— डॉ. घोष, CHC प्रभारी


कहाँ काम करती है RKS?

  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC)

  • शहरी स्वास्थ्य केंद्र (UHC)

  • जिला अस्पताल, सब-डिविजनल हॉस्पिटल

  • राज्य के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल

हर इकाई में एक स्वतंत्र RKS होती है – जो वहां की जरूरतों के अनुसार कार्य करती है।


आप RKS का हिस्सा कैसे बन सकते हैं?

  • अगर आप स्थानीय समाजसेवी, पंचायत सदस्य, शिक्षित नागरिक या NGO से हैं, तो आप RKS में चुने जा सकते हैं

  • आप अस्पताल के शिकायत रजिस्टर या RKS मीटिंग में अपनी बात रख सकते हैं

  • आप ASHA, ANM या RKS अध्यक्ष से मिलकर सुझाव या मदद मांग सकते हैं


क्यों जरूरी है रोगी कल्याण समिति?

  • क्योंकि हर अस्पताल में मरीज को आदर, दवा और देखभाल मिलनी चाहिए

  • क्योंकि नियंत्रण सिर्फ सरकार से नहीं, स्थानीय नागरिकों से भी होना चाहिए

  • क्योंकि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ सरकारी नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी भी है

  • क्योंकि हर मरीज को महसूस होना चाहिए —
    “यह अस्पताल मेरा भी है… मेरी बात यहाँ सुनी जाती है।”


अगर आपको लगता है:

  • आपके अस्पताल में कोई असुविधा है

  • सफाई, दवा, डॉक्टर की कमी है

  • मरीजों की अनदेखी हो रही है

  • या आप खुद इस समिति का हिस्सा बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं…

तो बताइए।


रोगी कल्याण समिति – अस्पताल और जनता के बीच का वो रिश्ता है जो सेवा को सिर्फ सुविधा नहीं, संवेदना बनाता है।

“जब अस्पताल में मरीज की मुस्कान लौट आए – समझिए RKS सच में काम कर रही है।” 

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