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स्कीट और ट्रैप शूटिंग: भविष्य के निशानेबाजों के लिए एक मार्गदर्शिका | Progress India

"स्कीट और ट्रैप शूटिंग में शॉटगन से निशाना लगाता भारतीय एथलीट"
स्कीट और ट्रैप शूटिंग से जोड़िए अपने सपनों को उड़ान।

स्कीट और ट्रैप (शॉटगन स्पर्धा): भारत के निशानेबाज़ों की नई उड़ान

शूटिंग का यह रूप केवल लक्ष्य साधने का खेल नहीं है, यह धैर्य, फोकस और पल में निर्णय लेने की कला है।


 स्कीट और ट्रैप: शॉटगन शूटिंग की दो रोमांचक शाखाएँ

  • स्कीट शूटिंग में मिट्टी की डिस्क (क्ले टारगेट) को दो टॉवर से एक विशेष एंगल पर उड़ाया जाता है।

  • ट्रैप शूटिंग में टारगेट एक ही दिशा (सामने की ओर) में लेकिन अलग-अलग एंगल्स पर छोड़े जाते हैं।

  • दोनों में शॉटगन का प्रयोग होता है, और हर सेकंड में निर्णय लेना जरूरी होता है।


 भारत में शॉटगन शूटिंग का सफर

  • भारत में पहले राइफल और पिस्टल शूटिंग का बोलबाला था, लेकिन अब शॉटगन में भी प्रतिभाएं उभर रही हैं।

  • मानवेंद्र सिंह, अंगद वीर बाजवा, मेराज अहमद खान जैसे नाम अब ग्लोबल मंच पर दिखने लगे हैं।

  • ओलंपिक, एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत की भागीदारी बढ़ी है।


 इस खेल में युवाओं की दिलचस्पी क्यों बढ़ रही है?

  • एक्शन-पैक्ड और रिफ्लेक्स-आधारित खेल होने के कारण युवाओं को यह चुनौतीपूर्ण लगता है।

  • नई तकनीकों और सरकारी सुविधाओं से अब प्रशिक्षण आसान हुआ है।

  • शूटिंग रेंज और उपकरणों की उपलब्धता पहले से बेहतर है।


 स्कीट और ट्रैप के लिए जरूरी बुनियादी चीजें

  • शॉटगन (12 bore) – खासतौर पर स्कीट और ट्रैप के लिए डिज़ाइन की गई।

  • क्ले टारगेट – जिसे उड़ाकर शूट किया जाता है।

  • ऑटोमैटिक ट्रैप मशीन – जो टारगेट को हवा में छोड़ती है।

  • इयर प्रोटेक्टर और शूटर ग्लासेस – सुरक्षा के लिए जरूरी।

  • स्पेशल शूटर जैकेट और वेस्ट – गोलियों और एक्सेसरीज़ को साथ रखने के लिए।


 भारत में कहां सीख सकते हैं स्कीट और ट्रैप?

  • डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज, दिल्ली – इंटरनेशनल लेवल की रेंज।

  • गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश – तेजी से उभरते हुए राज्य।

  • निजी क्लब और फेडरेशन ट्रेनिंग सेंटर – कई शहरों में मौजूद हैं।


 स्कीट और ट्रैप कैसे सीखें? (एक्शन प्लान)

  1. बेसिक जानकारी लें – शॉटगन और शूटिंग नियमों की समझ बनाएं।

  2. प्रमाणित कोच से ट्रेनिंग लें – फेडरेशन से जुड़ी किसी मान्यता प्राप्त रेंज पर जाएं।

  3. गन लाइसेंस और कानूनी प्रक्रिया समझें – भारत में हथियार रखने के लिए नियम जरूरी हैं।

  4. प्रतियोगिता में भाग लें – स्कूल, राज्य, नेशनल, फिर इंटरनेशनल लेवल तक बढ़ें।

  5. फिटनेस पर ध्यान दें – फोकस, स्टैमिना और बैलेंस जरूरी है।


 स्कीट और ट्रैप में मानसिक तैयारी

  • 1 सेकंड का भी फर्क परिणाम बदल सकता है – इसलिए मानसिक स्थिरता जरूरी।

  • मेडिटेशन, ब्रेथिंग एक्सरसाइज और माइंडफुलनेस से फोकस बेहतर होता है।

  • हर टारगेट पर उसी ऊर्जा से ध्यान देना सीखना पड़ता है।


 भारतीय खिलाड़ियों की प्रेरक कहानियाँ

 मेराज अहमद खान

  • ओलंपियन और विश्व स्तरीय ट्रैप शूटर।

  • उन्होंने दिखाया कि कैसे मेहनत और अनुशासन से भारत को गर्व दिलाया जा सकता है।

 अंगद वीर बाजवा

  • एशियन चैंपियन और ISSF वर्ल्ड कप विनर।

  • स्कीट शूटिंग में भारत का चेहरा।


 स्कीट और ट्रैप का ओलंपिक महत्व

  • दोनों खेल ओलंपिक स्पर्धाओं में शामिल हैं।

  • हर राउंड में कुल मिलाकर 125 टारगेट होते हैं।

  • 1 गलती पर अंक कट सकते हैं – इसलिए पूर्ण एकाग्रता जरूरी है।


 करियर विकल्प और आगे की राह

  • राष्ट्रीय खिलाड़ी बन सकते हैं।

  • कोचिंग और ट्रेनिंग सेंटर खोल सकते हैं।

  • डिफेंस, CISF, BSF जैसी एजेंसियों में स्पोर्ट्स कोटे से नौकरी मिल सकती है।

  • प्रायोजन और CSR फंडिंग से आर्थिक सहयोग भी मिलता है।


 सरकारी सहायता और योजनाएँ

  • Khelo India Scheme – शूटिंग स्पोर्ट्स के लिए विशेष फोकस।

  • TOPS (Target Olympic Podium Scheme) – योग्य खिलाड़ियों को सपोर्ट।

  • NSDF फंडिंग – उपकरण और अंतरराष्ट्रीय ट्रेनिंग के लिए सहयोग।


 परिवार और समाज की भूमिका

  • अक्सर ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ी आर्थिक दिक्कतों का सामना करते हैं।

  • माता-पिता की हिम्मत, स्कूल की सहायता और कोच का मार्गदर्शन उन्हें आगे बढ़ाता है।

  • समाज को इन खिलाड़ियों को सुरक्षा और गर्व की दृष्टि से देखना चाहिए।


✅ एक्शन प्लान: अगर आप स्कीट या ट्रैप सीखना चाहते हैं

  • 🟢 शूटिंग से जुड़ी किताबें और वीडियो देखें

  • 🟢 पास के रेंज या क्लब से संपर्क करें

  • 🟢 10वीं या 12वीं के बाद स्पोर्ट्स कोर्स में दाख़िला लें

  • 🟢 फिटनेस पर काम करें

  • 🟢 एक कोच ढूंढें और अनुशासित अभ्यास शुरू करें


 इंस्पिरेशनल थॉट

"एक टारगेट चूका तो क्या हुआ, अगला आपके फोकस और आत्मविश्वास का इंतजार कर रहा है।"


Progress India का उद्देश्य है कि भारत का हर युवा खेलों के ज़रिए अपनी ताक़त पहचाने और नई ऊँचाइयों तक पहुंचे। स्कीट और ट्रैप जैसे स्पोर्ट्स सिर्फ ट्रिगर खींचने की बात नहीं करते, ये सिखाते हैं – धैर्य, निर्णय और आत्मनियंत्रण


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FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. स्कीट और ट्रैप शूटिंग में क्या अंतर है?
A. स्कीट शूटिंग में लक्ष्य एक निश्चित पथ पर चलते हैं जबकि ट्रैप शूटिंग में लक्ष्य अलग-अलग दिशाओं में उड़ते हैं, जिससे निशाना लगाना चुनौतीपूर्ण होता है।

Q2. क्या भारत में स्कीट और ट्रैप शूटिंग की ट्रेनिंग मिलती है?
A. हाँ, भारत में कई निशानेबाजी अकादमियाँ और खेल प्राधिकरण केंद्र स्कीट और ट्रैप शूटिंग की ट्रेनिंग देते हैं, जैसे कि नेशनल रायफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) से मान्यता प्राप्त संस्थान।

Q3. स्कीट और ट्रैप खेल में भाग लेने के लिए उम्र सीमा क्या है?
A. आमतौर पर इस खेल में 12 वर्ष से ऊपर के प्रतिभागी भाग ले सकते हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धात्मक स्तर पर फिटनेस और अनुशासन जरूरी होता है।

Q4. क्या स्कीट और ट्रैप ओलंपिक खेलों में शामिल हैं?
A. हाँ, दोनों ही स्पर्धाएँ ओलंपिक शूटिंग इवेंट्स का हिस्सा हैं और इनमें भारत के खिलाड़ी भी भाग लेते रहे हैं।

Q5. स्कीट और ट्रैप शूटिंग में करियर कैसे शुरू करें?
A. स्थानीय शूटिंग क्लब में रजिस्ट्रेशन कर ट्रेनिंग शुरू करें, प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें और फिर राज्य या राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में आगे बढ़ें।


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