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स्क्वैश: भारत में उभरता खेल – खिलाड़ियों, अवसरों और भविष्य की पूरी गाइड (2025)

"एक भारतीय युवा खिलाड़ी स्क्वैश कोर्ट में दीवार से गेंद मारते हुए – तेज़ गति, एकाग्रता और अनुशासन की तस्वीर"
 युवा खिलाड़ी स्क्वैश कोर्ट में दीवार से गेंद मारते हुए

 स्क्वैश: एक तेज़-तर्रार खेल, जो फिटनेस और फोकस दोनों सिखाता है

स्क्वैश, एक इनडोर रैकेट स्पोर्ट, जो हर युवा को तेजी, रणनीति और सहनशक्ति का पाठ पढ़ाता है। यह खेल न सिर्फ शरीर को फिट बनाता है, बल्कि मन को भी सतर्क रखता है।

आइए जानते हैं स्क्वैश से जुड़ी हर जरूरी जानकारी — खेल की बारीकियाँ, तैयारी के टिप्स, करियर के मौके और सरकारी व निजी सहयोग।


 स्क्वैश क्या है?

  • स्क्वैश एक इनडोर कोर्ट में दो (या चार) खिलाड़ियों द्वारा रैकेट और रबर बॉल से खेला जाता है।

  • खिलाड़ी बारी-बारी से दीवार पर बॉल मारते हैं और बॉल को जमीन से दो बार टकराने से पहले वापसी करनी होती है।

  • स्क्वैश का खेल 1880 के आसपास इंग्लैंड में शुरू हुआ।


 स्क्वैश क्यों खेलें?

  • शारीरिक फिटनेस: हाई इंटेंसिटी कार्डियो एक्सरसाइज।

  • मानसिक फोकस: तेज़ निर्णय और रणनीतिक सोच।

  • फुर्ती व लचीलापन: शरीर में गति और संतुलन का समन्वय।

  • डेली स्ट्रेस में राहत: पसीना बहाकर टेंशन दूर होती है।


 भारत में स्क्वैश की स्थिति

  • भारत में स्क्वैश धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है, खासकर महानगरों में।

  • जोशना चिनप्पा और सौरव घोषाल जैसे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके हैं।

  • नेशनल स्क्वैश चैंपियनशिप, SAI और PSAI जैसी संस्थाएं इस खेल को प्रमोट कर रही हैं।


 स्क्वैश खेलने की ज़रूरी चीजें

1. स्क्वैश रैकेट

  • हल्का, तेज़ और ग्रिप वाला हो।

2. स्क्वैश बॉल

  • बॉल की बाउंस स्पीड – शुरुआती के लिए ज्यादा बाउंस वाली और प्रो के लिए कम।

3. शूज़ और ड्रेस

  • कोर्ट शूज़ (non-marking sole) और breathable कपड़े।

4. कोर्ट एक्सेस

  • इनडोर स्क्वैश कोर्ट जिसमें चार दीवारें होती हैं।


 स्क्वैश सीखने के स्टेप्स

🔹 बेसिक्स समझिए

  • रूल्स, कोर्ट के डाइमेंशन और पॉइंट सिस्टम को जानें।

🔹 प्रॉपर कोचिंग लें

  • किसी प्रमाणित कोच से ट्रेनिंग लें।

🔹 रैकेट हैंडलिंग सीखें

  • फोरहैंड, बैकहैंड, ड्राइव और ड्रॉप शॉट पर ध्यान दें।

🔹 फिटनेस ट्रेनिंग करें

  • रनिंग, स्ट्रेचिंग, फुर्ती और स्टेमिना बढ़ाने वाली एक्टिविटीज़ करें।

🔹 रेगुलर प्रैक्टिस करें

  • हफ्ते में 3-4 बार खेलें और स्किल्स को लगातार बेहतर करें।


 स्क्वैश कहां सीखें?

  • SAI Centers (Sports Authority of India)

  • Private Academies (Delhi, Mumbai, Chennai, Pune आदि में)

  • University/College Sports Complexes

  • Club Courts (YMCA, DDA, CRPF, Army Clubs आदि)


 स्क्वैश में करियर के अवसर

🔸 प्रोफेशनल प्लेयर

  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेकर करियर बना सकते हैं।

🔸 कोचिंग

  • निजी अकैडमी या सरकारी संस्थान में कोच बन सकते हैं।

🔸 फिजिकल ट्रेनर या स्ट्रेटेजिस्ट

  • स्क्वैश खिलाड़ियों के साथ फिटनेस या टेक्निकल कोचिंग।

🔸 स्पोर्ट्स मैनेजमेंट / स्काउटिंग

  • खिलाड़ियों की पहचान और टैलेंट मैनेजमेंट।


 सरकारी योजनाएं और समर्थन

खेलो इंडिया योजना

  • स्क्वैश खिलाड़ियों के लिए ट्रायल, स्कॉलरशिप और ट्रेनिंग कैंप।

SAI टैलेंट सर्च स्कीम

  • अंडर-14 / अंडर-17 बच्चों की पहचान और ट्रेनिंग।

राज्य स्तरीय स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप

  • MP, Delhi, Maharashtra जैसे राज्यों में स्क्वैश खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता।

साई और नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन से मदद

  • नेशनल टूर्नामेंट्स, ट्रेनिंग, ट्रैवल और उपकरण पर सब्सिडी।


 जरूरी टूर्नामेंट्स

  • नेशनल स्क्वैश चैंपियनशिप

  • South Asian Games

  • Asian Individual Squash Championship

  • World Junior Squash Championship


 स्कूल-कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए सुझाव

6वीं क्लास से ही शुरू करें स्क्वैश क्लब्स में जाना
स्पोर्ट्स कोटे से आगे की पढ़ाई की योजना बनाएं
District > State > National level प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें
अपने कोच या स्कूल प्रिंसिपल से स्कॉलरशिप और सपोर्ट की जानकारी लें


 स्क्वैश बदल सकता है जिंदगी

"मैंने स्क्वैश 9वीं क्लास में सीखा था, शुरुआत में सिर्फ फिटनेस के लिए। लेकिन धीरे-धीरे यह जुनून बन गया। अब मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स कोटे से पढ़ रहा हूँ और नेशनल लेवल पर खेल चुका हूँ।"
रोहित शर्मा, स्क्वैश खिलाड़ी, दिल्ली

"मेरी बेटी गांव से निकलकर Bhopal SAI में स्क्वैश सीख रही है। हम कभी नहीं सोच सकते थे कि उसे भी विदेश जाने का मौका मिलेगा, लेकिन अब उसे अंडर-17 टूर्नामेंट के लिए मलेशिया जाना है।"
सुनीता देवी, अभिभावक


 एक्शन प्लान: स्क्वैश में करियर कैसे बनाएं?

✔ स्क्वैश क्लब या अकैडमी जॉइन करें
✔ बेसिक ट्रेनिंग लें और फिजिकल फिटनेस बढ़ाएं
✔ ज़िले या राज्य की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें
✔ SAI और खेलो इंडिया जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़ें
✔ स्कूल-कॉलेज में स्पोर्ट्स कोटे का लाभ लें
✔ लगातार मेहनत और सही मार्गदर्शन से आगे बढ़ें


 भारत में स्क्वैश एक तेजी से लोकप्रिय होता खेल है।

स्क्वैश एक शानदार करियर विकल्प है, जो आज़ादी, फिटनेस और अवसरों से भरपूर है। सिर्फ बड़े शहर नहीं, अब छोटे शहरों और गांवों के युवा भी इस खेल के जरिए अपनी पहचान बना रहे हैं।

Progress India हर खिलाड़ी के साथ है — आपके जुनून से लेकर जीत तक के सफर में।


  Resources

🔗 SAI वेबसाइट पर स्क्वैश अकैडमी की सूची
🔗 स्क्वैश रैकेट और गियर कहां खरीदें


अगर आप स्क्वैश से जुड़ी कोई जानकारी या सहयोग चाहते हैं, तो हमसे संपर्क करें:
 admin@progressindia.in
 WhatsApp: 8287-875-794


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 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल):

Q1. स्क्वैश खेल क्या है और इसे कैसे खेला जाता है?
A: स्क्वैश एक इनडोर रैकेट स्पोर्ट है जिसमें दो खिलाड़ी दीवारों पर गेंद मारते हैं। इसे तेज़ गति और रिफ्लेक्स की आवश्यकता होती है।

Q2. क्या भारत में स्क्वैश खेलने के अवसर हैं?
A: हां, भारत में स्क्वैश के कई अकादमी, स्कॉलरशिप योजनाएं और टूर्नामेंट हैं, जैसे नेशनल स्क्वैश चैंपियनशिप और स्कूल गेम्स फेडरेशन इवेंट्स।

Q3. स्क्वैश में करियर कैसे बनाया जा सकता है?
A: प्रशिक्षण, रेगुलर अभ्यास और प्रतियोगिताओं में भाग लेकर खिलाड़ी इंटरनेशनल लेवल तक पहुंच सकते हैं। SAI और PSA जैसी संस्थाएं भी मदद करती हैं।

Q4. स्क्वैश के लिए उम्र सीमा क्या है?
A: 8 साल की उम्र से स्क्वैश शुरू किया जा सकता है और 35-40 साल तक खेला जा सकता है। प्रो लेवल के लिए शुरुआत जल्दी होनी चाहिए।

Q5. क्या स्क्वैश को ओलंपिक में शामिल किया गया है?
A: हां, स्क्वैश को 2028 लॉस एंजेलेस ओलंपिक में शामिल किया गया है, जो भारत के खिलाड़ियों के लिए बड़ा मौका है।

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