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छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना 2025 – किसानों को गोबर से आय

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र में खुशहाल लाभार्थी, जो पारंपरिक परिधानों में मुस्कुराते हुए खड़े हैं,

गोधन न्याय योजना – छत्तीसगढ़ का हर गोठान बनेगा संपन्न!

छत्तीसगढ़ सरकार की “गोधन न्याय योजना” एक ऐसी पहल है,
जहां पशुधन, किसान और पर्यावरण – तीनों को न्याय मिलता है।
यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनर्जागरण है।


1. योजना का उद्देश्य (Objective)

👉 ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना।
👉 पशुपालकों को उनके गोबर का उचित मूल्य दिलाना।
👉 जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन को बढ़ावा देना।
👉 पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ गांवों का निर्माण करना।
👉 गौठानों को आत्मनिर्भर “रोज़गार केंद्र” बनाना।


2. योजना की शुरुआत कब और कैसे हुई

 योजना की शुरुआत – 20 जुलाई 2020
 शुरूआती चरण – राज्य के छत्तीसगढ़ के सभी गौठानों में
 इस योजना को “राजीव गांधी किसान न्याय” के पूरक के रूप में शुरू किया गया।

सरकार ने निर्णय लिया कि
👉 ग्रामीणों से गोबर ₹2 प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा,
और उससे जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और बायो-एनर्जी तैयार की जाएगी।


3. योजना के तहत लाभ (Benefits)

गोबर का निश्चित मूल्य – ₹2 प्रति किलो
साप्ताहिक भुगतान सीधे DBT के ज़रिए।
गौठान समितियों के माध्यम से स्थानीय खरीद।
महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार।
जैविक खाद बिक्री से पंचायत को अतिरिक्त आय।
खेती की लागत में कमी और भूमि की उर्वरता में वृद्धि।


4. किसे मिलता है लाभ (Eligibility)

✅ ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालक या किसान।
✅ छत्तीसगढ़ का स्थायी निवासी।
✅ जिसके पास गाय, भैंस, बैल आदि पालतू पशु हैं।
✅ जो गौठान में गोबर बेचने के लिए पंजीकृत है।


5. पंजीयन प्रक्रिया (Registration Process)

Step-by-Step Process:
1️⃣ नज़दीकी गौठान या ग्राम पंचायत में जाएं।
2️⃣ अपना नाम, पता और पशुओं की जानकारी दें।
3️⃣ गौठान समिति आपके पंजीयन की पुष्टि करेगी।
4️⃣ पंजीकृत होने के बाद आप नियमित रूप से गोबर बेच सकते हैं।
5️⃣ भुगतान सीधे आपके बैंक खाते में DBT से भेजा जाएगा।

ऑनलाइन सुविधा:
“छत्तीसगढ़ गोधन न्याय पोर्टल” पर जाकर आप अपनी लेन-देन रिपोर्ट भी देख सकते हैं।


6. योजना के प्रमुख घटक (Key Components)

(A) गोबर खरीद:

  • किसानों और पशुपालकों से ₹2/किलो की दर से खरीदी।

(B) वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन:

  • गोबर से प्राकृतिक जैविक खाद बनाना।

(C) महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका:

  • महिलाएं खाद तैयार करती हैं, पैकिंग करती हैं, और बिक्री में सहयोग देती हैं।

(D) गौठान विकास:

  • गौठानों को मिनी उत्पादन केंद्र में बदला जा रहा है।


7. पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव (Impact)

पर्यावरण की सुरक्षा:

  • गोबर सड़क या नालियों में फेंकने की बजाय उत्पादक संसाधन बना।

स्वच्छता में सुधार:

  • गांवों में गंध और गंदगी कम हुई।

महिलाओं के लिए रोजगार:

  • लाखों महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट बनाने में जुड़ीं।

आर्थिक सशक्तिकरण:

  • ग्रामीण परिवारों की आमदनी में वृद्धि हुई।


8. अब तक का प्रदर्शन (Progress Report)

राज्य सरकार की रिपोर्ट (2025 तक)

  • कुल गौठान – 10,600+ सक्रिय गौठान

  • पंजीकृत लाभार्थी – 2.5 लाख से अधिक

  • खरीदा गया गोबर – 120 लाख क्विंटल से अधिक

  • भुगतान – ₹240 करोड़ से अधिक किसानों को वितरित

  • वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन – 22 लाख क्विंटल से अधिक


9. कैसे बदल रहा है गांव का चेहरा

 अब गोबर “बेकार” नहीं, “बाज़ार” बन गया है।
 किसान अपनी फसलों में यही जैविक खाद इस्तेमाल करते हैं।
 महिलाओं की आमदनी बढ़ रही है।
 पर्यावरण और खेत दोनों उपजाऊ बन रहे हैं।


10. भविष्य की दिशा (Future Vision)

बायोगैस संयंत्र:
गोबर से बिजली और गैस उत्पादन की दिशा में कदम।

जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग:
“गोबरधन” ब्रांड से खाद और अन्य उत्पादों की बिक्री।

रोजगार विस्तार:
हर गौठान को “मिनी इंडस्ट्रियल हब” बनाना।

ग्रीन छत्तीसगढ़ मिशन:
गोबर आधारित कृषि प्रणाली से “कार्बन-न्यूट्रल” गांवों की दिशा।


11. योजना की खास बातें (Highlights)

 यह योजना सिर्फ किसान या पशुपालक की नहीं, गांव की अर्थव्यवस्था की धुरी है।
‘गोबर को संपत्ति’ में बदलने वाला भारत का पहला मॉडल।
 स्वच्छता, रोजगार, कृषि और महिला सशक्तिकरण – सबका समावेश।
 ग्रामीण आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण।


12. एक बदलाव की कहानी

“पहले हम गोबर फेंक देते थे,” – कहती हैं गौठान समिति की सदस्य सुमित्रा बाई
“अब वही गोबर हमारे लिए कमाई का जरिया बन गया।
हर हफ्ते ₹400-500 मिल जाते हैं, और खेत की मिट्टी भी सुधर गई।”

यह कहानी सिर्फ सुमित्रा की नहीं,
बल्कि उन लाखों ग्रामीण महिलाओं की है,
जो आज गोधन न्याय योजना के ज़रिए आत्मनिर्भर बन रही हैं।


13. निष्कर्ष (Conclusion)

“गोधन न्याय योजना” ने छत्तीसगढ़ के गांवों में
आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय न्याय – तीनों को जोड़ा है।

यह सिर्फ “गोबर खरीद” नहीं,
बल्कि “गांवों की हरियाली, खुशहाली और आत्मनिर्भरता” की दिशा में ठोस कदम है।


Progress India Takeaway:

✅ छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा मॉडल जहां “अपशिष्ट से उत्पन्न हुआ अवसर”।
✅ पशुधन, महिला शक्ति और पर्यावरण – तीनों के बीच न्याय का पुल।
✅ भारत के हर राज्य को अपनाने योग्य “Green-Rural-Economy Model”।


छत्तीसगढ़ की सभी सरकारी योजनाओं की पूरी सूची 2025

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. गोधन न्याय योजना क्या है?
👉 यह छत्तीसगढ़ सरकार की योजना है जिसमें किसानों और पशुपालकों से ₹2 प्रति किलो की दर से गोबर खरीदा जाता है।

Q2. इस योजना का उद्देश्य क्या है?
👉 ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना, जैविक खाद बनाना और महिलाओं को रोजगार देना।

Q3. योजना का लाभ किसे मिलता है?
👉 पंजीकृत किसान, पशुपालक और महिला स्व-सहायता समूहों को।

Q4. भुगतान कैसे किया जाता है?
👉 गोबर की खरीद के बाद राशि सीधे DBT के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।

Q5. आवेदन कैसे करें?
👉 अपने नज़दीकी गौठान या ग्राम पंचायत में जाकर पंजीयन कराएं।

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