Skip to main content

नरवा-गरवा-घुरवा-बारी योजना 2025 – छत्तीसगढ़ का ग्रामीण मॉडल

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र में खुशहाल लाभार्थी,

नरवा-गऊवा-घुरवा-बारी योजना – छत्तीसगढ़ का ग्रामीण पुनर्जागरण मॉडल

छत्तीसगढ़ की पहचान अब सिर्फ धान के कटोरे के रूप में नहीं,
बल्कि एक “सतत ग्रामीण विकास राज्य” के रूप में हो रही है।

राज्य सरकार की “नरवा, गरवा, घुरवा और बारी” पहल
ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता का ऐसा मॉडल है
जो गांवों में जीवन, रोजगार और समृद्धि तीनों ला रहा है।


1. योजना का सारांश (What is N-G-G-B Mission?)

यह योजना चार पारंपरिक संसाधनों के संरक्षण और विकास पर केंद्रित है –

नरवा (जल संरक्षण) – नालों, नदियों और जल स्रोतों का पुनर्जीवन।
गरवा (पशुधन संरक्षण) – पशुओं की देखभाल और गोठानों का विकास।
घुरवा (जैविक खाद उत्पादन) – गोबर और अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद बनाना।
बारी (घरेलू बागवानी) – परिवारों के लिए सब्ज़ी उत्पादन और पोषण सुरक्षा।

यह योजना ग्राम्य जीवन को पर्यावरणीय संतुलन और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में जोड़ती है।


2. योजना की शुरुआत और उद्देश्य

शुरुआत: वर्ष 2019
लॉन्च किया गया: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा
मुख्य उद्देश्य:

  • ग्रामीण संसाधनों का पुनर्जीवन

  • किसानों की आय में वृद्धि

  • प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

  • जल और मिट्टी संरक्षण

  • ग्राम पंचायतों में रोजगार सृजन


3. नरवा – जल का पुनर्जीवन (Water Revival Mission)

 “नरवा” यानी नालों और नदियों में पानी रोकने और भूजल स्तर बढ़ाने की पहल।

मुख्य कार्य:

  • छोटे नालों पर चेक डैम और तालाबों का निर्माण

  • वर्षा जल संचयन

  • जलग्रहण क्षेत्र का वैज्ञानिक प्रबंधन

परिणाम:

  • गांवों में जल संकट में कमी

  • सिंचाई क्षमता में वृद्धि

  • खेतों की उत्पादकता में सुधार

“अब खेतों में साल भर हरियाली है, क्योंकि नरवा में पानी है।”
– किसान मोहन साहू, महासमुंद


4. गरवा – पशुधन की सुरक्षा और सेवा

छत्तीसगढ़ का गांव पशुधन से ही समृद्ध है।
“गरवा” पहल का मकसद है –
पशुओं की देखभाल, टीकाकरण और गोठान आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना।

मुख्य कार्य:

  • गोठानों का निर्माण और मरम्मत

  • आवारा पशुओं की देखभाल

  • दुधारू पशुओं के लिए चारा व्यवस्था

  • पशु चिकित्सा और टीकाकरण

अब हर गांव का गोठान “रोज़गार केंद्र” बन गया है।


5. घुरवा – जैविक खाद उत्पादन (Organic Revolution)

“घुरवा” का मतलब है –
घर और खेत से निकले अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद बनाना।

लाभ:

  • रासायनिक खाद पर निर्भरता कम

  • मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि

  • खेती की लागत में कमी

महिलाओं की भूमिका:
महिला स्व-सहायता समूह घुरवा केंद्रों में खाद तैयार कर रहे हैं,
जिससे उन्हें नियमित आमदनी मिल रही है।

“पहले कचरा था, अब यही हमारी आय का जरिया है।”
– ममता बाई, कवर्धा


6. बारी – हर घर की बगिया (Home Nutrition Garden)

“बारी” पहल का उद्देश्य है –
हर परिवार के घर के पास सब्ज़ी और फल की बगिया लगाना,
ताकि पोषण और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ें।

मुख्य लाभ:

  • परिवार को ताज़ी सब्ज़ियाँ

  • पोषण सुरक्षा

  • अतिरिक्त सब्ज़ियाँ बेचकर आमदनी

 अब हर घर “बारी” से भरपूर है,
और महिलाएँ अपनी बगिया से परिवार का पोषण संभाल रही हैं।


7. योजना के चारों घटकों का सामंजस्य

घटक मुख्य उद्देश्य सीधा लाभ
नरवा जल संरक्षण सिंचाई और भूजल वृद्धि
गरवा पशुधन कल्याण दूध, गोबर, आय
घुरवा जैविक खाद सस्ती खेती, उर्वर मिट्टी
बारी पोषण बागवानी स्वास्थ्य, आय और आत्मनिर्भरता

 चारों घटक मिलकर “संपूर्ण ग्रामीण विकास मॉडल” तैयार करते हैं।


8. पर्यावरणीय लाभ (Eco-Benefits)

 कार्बन उत्सर्जन में कमी
 जल संचयन से सूखे का खतरा घटा
 मिट्टी में जैविक तत्वों की वृद्धि
 हरियाली और जैव विविधता का विस्तार


9. सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

रोजगार सृजन:
गौठानों, घुरवा केंद्रों और बारी योजनाओं में हजारों ग्रामीण कार्यरत।

महिला सशक्तिकरण:
महिलाओं को खाद उत्पादन और बागवानी में स्वावलंबन मिला।

ग्राम स्वच्छता:
अपशिष्ट अब कचरा नहीं, संसाधन बन गया।

किसानों की लागत में कमी:
जैविक खाद और जल संरक्षण से खेती की लागत घटी।


10. अब तक की उपलब्धियाँ (Progress Report)

राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार:

  • नरवा पुनर्जीवन: 5000+ नालों में कार्य पूरा।

  • गोठान विकसित: 10,600+ सक्रिय केंद्र।

  • घुरवा केंद्र: 15,000 से अधिक खाद इकाइयाँ।

  • बारी पहल: 12 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित।

 कुल मिलाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ₹400 करोड़ से अधिक का प्रवाह।


11. भविष्य की दिशा (Future Vision)

 हर गांव में “Integrated Livelihood Cluster” का निर्माण।
 पशुधन आधारित उद्योग (दूध, खाद, बायोगैस)।
 जल संरक्षण के लिए सैटेलाइट मॉनिटरिंग सिस्टम।
 ग्रामीण युवाओं को “Green Skill Training”।


12. एक नई आशा

“पहले खेत सूख जाते थे, अब पानी की कमी नहीं।”
“पहले कचरा था, अब वही खाद बनकर खेत को उपजाऊ कर रहा है।”
“पहले महिलाएँ घर तक सीमित थीं, अब वे हर बारी की मालिक हैं।”

 ये कहानियाँ बताती हैं कि नरवा-गरवा-घुरवा-बारी
सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि गांवों में परिवर्तन की क्रांति है।


13. निष्कर्ष (Conclusion)

“नरवा, गरवा, घुरवा, बारी” – ये चार शब्द छत्तीसगढ़ की आत्मा हैं।
इनसे गांवों में रोज़गार, संसाधन और सम्मान लौट आया है।

यह पहल बताती है कि अगर नीति “धरती से जुड़ी” हो,
तो उसका असर “हर खेत, हर घर और हर दिल” तक पहुँचता है।


Progress India Takeaway:

✅ पर्यावरण-संरक्षण और आर्थिक विकास का संयुक्त मॉडल।
✅ महिला, किसान और ग्राम पंचायत – तीनों का सशक्तिकरण।
✅ “स्थानीय से वैश्विक” सोच की जीवंत मिसाल।


छत्तीसगढ़ की सभी सरकारी योजनाओं की पूरी सूची 2025

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. नरवा-गरवा-घुरवा-बारी योजना क्या है?
👉 यह छत्तीसगढ़ सरकार की ग्रामीण विकास योजना है, जो जल संरक्षण, पशुधन सेवा, जैविक खाद और बागवानी को बढ़ावा देती है।

Q2. योजना के चार घटक कौन-कौन से हैं?
👉 नरवा (जल संरक्षण), गरवा (पशुधन सेवा), घुरवा (जैविक खाद उत्पादन) और बारी (घरेलू बागवानी)।

Q3. इस योजना से ग्रामीणों को क्या लाभ मिलते हैं?
👉 रोजगार सृजन, खेती की लागत में कमी, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और पोषण सुरक्षा।

Q4. यह योजना कब शुरू की गई थी?
👉 वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा ग्रामीण पुनर्जागरण के लक्ष्य के साथ शुरू की गई।

Q5. क्या इस योजना का लाभ हर गांव को मिल रहा है?
👉 हाँ, सभी ग्राम पंचायतों में गौठान, घुरवा केंद्र और बारी कार्यक्रम संचालित हैं।

Comments

Popular posts from this blog

UP में दिव्यांगों के लिए UPSRTC निःशुल्क बस यात्रा सुविधा

Free Travel Facility for Persons with Disabilities उत्तर प्रदेश में दिव्यांगों के लिए UPSRTC (राज्य परिवहन निगम) द्वारा निःशुल्क बस यात्रा सुविधा उपलब्ध है। इसे Free Travel Facility for Persons with Disabilities Rules‑2019 के अंतर्गत लागू किया गया है। नीचे विस्तार से जानकारी दी गई है 👇  कौन लाभ उठा सकता है? कोई भी दिव्यांग (≥40% विकलांगता) 80% या अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्ति साथ में एक सहयात्री का भी लाभ उठा सकते हैं   कहाँ से-सब तक यात्रा? UPSRTC की सभी ‘ordinary’ (साधारण) बसों में मुफ्त यात्रा राजधानी, सिटी / ई‑बसों में भी यह सुविधा लागू  सुविधा राज्य-सीमा के अंदर और बाहर दोनों क्षेत्रों में मान्य है ✔️ आवश्यक दस्तावेज मूल disability certificate (Chief Medical Officer/Comp. Medical Officer द्वारा जारी) Aadhaar कार्ड या UDID कार्ड (उपस्थिति अनिवार्य) ( uphwd.gov.in )  नियम और उपयोग कैसे करें? बस स्टाफ को यात्रा आरंभ से पहले दस्तावेज़ दिखाएं रिजिस्ट्रेशन या अग्रिम टिकटिंग अनिवार्य नहीं है; बस में सवार होते समय यह ...

बिहार सरकार की योजनाएँ 2025: पूरी अपडेटेड सूची और लाभ

योजनाएँ 2025 बिहार सरकार की योजनाएँ 2025 – आम लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाली सबसे ज़रूरी योजनाएँ 2025 में बिहार सरकार की योजनाएँ सिर्फ कागज़ पर नहीं, बल्कि ज़मीनी जरूरतों को देखते हुए बनाई जा रही हैं— ग्रामीण, महिलाएँ, किसान, छात्र, और युवाओं के जीवन में सीधा प्रभाव डालने वाली योजनाएँ।  1. योजना: बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड (BSCC) (युवा वर्ग के लिए सबसे प्रभावी योजना) मुख्य उद्देश्य किसी भी आर्थिक रूप से कमजोर छात्र की पढ़ाई पैसे की वजह से न रुके। 4 लाख रुपये तक की बिना-गारंटी शिक्षा ऋण सुविधा। कौन लाभ ले सकता है? बिहार का निवासी छात्र। 12वीं पास। उच्च शिक्षा (Graduation / Professional Courses) कर रहा हो। लाभ 4 लाख तक का लोन सिर्फ 1% ब्याज पढ़ाई पूरी होने के बाद ही EMI कई कोर्सेज 0% ब्याज पर भी उपलब्ध एक्शन स्टेप वेबसाइट पर जाएँ → 7nishchay-yuvaupmission.bihar.gov.in ऑनलाइन आवेदन, डॉक्यूमेंट अपलोड जिला स्तर पर वेरिफिकेशन → बैंक से स्वीकृति  2. योजना: मुख्यमंत्री महिला समृद्धि योजना 2025 उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को छोटा व्यवस...

राजस्थान में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बनवाएं: आसान प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज़

अब जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना हुआ आसान!  राजस्थान में जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बनवाएं? जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र न केवल दस्तावेज हैं, बल्कि ये व्यक्ति की पहचान, अस्तित्व और अधिकारों का प्रमाण होते हैं। अगर आप राजस्थान में रहते हैं और सोच रहे हैं कि यह सर्टिफिकेट कैसे बनवाएं – तो यह गाइड आपके लिए है।  भाग 1: जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)  क्यों ज़रूरी है जन्म प्रमाण पत्र? स्कूल में एडमिशन के लिए आधार कार्ड और पासपोर्ट बनवाने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भविष्य में पहचान पत्र बनवाने के लिए  कब बनवाएं? बच्चे के जन्म के 21 दिन के भीतर आवेदन करना सबसे बेहतर होता है। देर से आवेदन पर अफिडेविट और मजिस्ट्रेट अप्रूवल की ज़रूरत हो सकती है।  जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़: बच्चे का नाम (अगर रखा गया हो) माता-पिता की पहचान (Aadhaar, वोटर ID) अस्पताल से मिला जन्म प्रमाण पत्र (यदि हॉस्पिटल में जन्म हुआ) निवास प्रमाण पत्र (Electricity Bill, Ration Card आदि) ...