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जमीन का बंटवारा कैसे करें? | सहमति और कानूनी तरीके से संपत्ति का विभाजन Progress India

एक किसान खेत में खड़ा होकर एक डिवाइस का उपयोग करते हुए जमीन के बंटवारे की योजना बना रहा है। पृष्ठभूमि में हरी-भरी फसलें और एक छोटा सा घर दिखाई देता है।
जमीन बंटवारा प्रक्रिया, जमीन का बंटवारा दस्तावेज़

जमीन का बंटवारा कैसे करें? – आसान गाइड

भारत में जमीन सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति है।
कई बार परिवार बढ़ने या भाई-बहनों के बीच हिस्सेदारी तय करने की ज़रूरत पड़ती है।
ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल उठता है – जमीन का बंटवारा कैसे करें?

यहाँ हम आपको बताएंगे कानूनी, प्रशासनिक और व्यावहारिक तरीके,
ताकि आप अपनी जमीन का बंटवारा बिना विवाद और तनाव के करवा सकें।


 पहले यह समझें: जमीन का बंटवारा क्यों ज़रूरी है?

  • परिवार के सभी सदस्यों को उनके अधिकार मिलें।

  • भविष्य के विवाद और झगड़े कम हों।

  • जमीन बेचने, गिरवी रखने या लोन लेने में दिक्कत न आए।

  • कानूनी दस्तावेज़ साफ़ और अपडेटेड रहें।


जमीन बंटवारे के मुख्य तरीके

1. आपसी सहमति से बंटवारा (Mutual Partition)

✅ आसान और तेज़ तरीका।
✅ परिवार के सभी सदस्य मिलकर जमीन का बंटवारा तय करते हैं।
✅ बाद में इसे रजिस्ट्री ऑफिस में रजिस्टर्ड कराना जरूरी है


2. रजिस्ट्री ऑफिस के माध्यम से बंटवारा

  • सभी वारिस या सदस्य आपसी सहमति पत्र (Partition Deed) तैयार करते हैं।

  • स्टांप पेपर पर लिखा जाता है और रजिस्ट्री ऑफिस में रजिस्टर्ड कराया जाता है।

  • रजिस्ट्री के बाद हर व्यक्ति अपने हिस्से का मालिक बन जाता है।


3. राजस्व विभाग (Circle Office) में बंटवारा

  • अंचल/राजस्व अधिकारी के पास आवेदन दें।

  • सीमांकन करवाकर अलग-अलग खाता/खेसरा नंबर जारी कर दिए जाते हैं।

  • इस प्रक्रिया को “दाखिल-खारिज (Mutation)” भी कहते हैं।


4. कोर्ट के आदेश से बंटवारा (Court Partition)

  • अगर आपसी सहमति नहीं बनती तो सिविल कोर्ट में केस दर्ज करें।

  • कोर्ट सबूतों और गवाहों के आधार पर बंटवारा तय करता है।

  • कोर्ट आदेश के बाद राजस्व विभाग रिकॉर्ड अपडेट करता है।


जमीन का बंटवारा करने के लिए जरूरी दस्तावेज़

  • मूल खतियान / जमाबंदी

  • जमीन का नक्शा

  • लगान रसीद

  • सभी वारिसों का पहचान पत्र (आधार / वोटर आईडी)

  • मृत्यु प्रमाण पत्र (अगर मालिक की मृत्यु हो चुकी है)

  • आपसी सहमति पत्र (अगर Mutual Partition हो रहा है)


 जमीन बंटवारे की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

 Step 1: वारिसों की सूची तैयार करें

  • सबसे पहले देखें कि जमीन के सभी वैध वारिस कौन हैं।

  • आधार कार्ड, वंशावली प्रमाण पत्र, और रिश्ते का सबूत जरूरी है।


Step 2: सीमांकन (Demarcation) करवाएँ

  • राजस्व विभाग से आवेदन देकर सीमांकन करवाएँ।

  • सर्वेक्षक जमीन का नक्शा बनाकर सीमा तय करता है।


 Step 3: आपसी सहमति बनाएँ

  • परिवार बैठकर हिस्से तय करें।

  • विवाद से बचने के लिए सब कुछ लिखित में लें।


 Step 4: रजिस्ट्री ऑफिस में Partition Deed कराएँ

  • वकील या लेखक से Partition Deed तैयार कराएँ।

  • सभी वारिसों के हस्ताक्षर करवाएँ।

  • रजिस्ट्री ऑफिस में पंजीकृत कराएँ।


 Step 5: दाखिल-खारिज (Mutation) करवाएँ

  • रजिस्ट्री के बाद Circle Office में आवेदन करें।

  • प्रत्येक वारिस के नाम से नया खाता/खेसरा नंबर जारी होगा।

  • इसके बाद जमीन का राजस्व रिकॉर्ड अपडेट हो जाएगा।


 जमीन बंटवारे में आने वाली आम समस्याएँ

  • आपसी विवाद – भाई-बहनों में सहमति न बनना।

  • नकली दस्तावेज़ – कोई गलत कागज़ पेश कर दे।

  • अतिक्रमण (Encroachment) – तीसरे पक्ष का कब्ज़ा होना।

  • प्रशासनिक देरी – दाखिल-खारिज या सीमांकन में लंबा समय लगना।


 इन समस्याओं से बचने के उपाय

✔ सभी दस्तावेज़ पहले से इकट्ठा करें।
✔ आपसी सहमति को लिखित रूप दें।
✔ राजस्व कार्यालय में ऑनलाइन स्टेटस चेक करते रहें।
✔ जरूरत पड़ने पर वकील की मदद लें।
✔ खुद से कब्जा हटाने की बजाय प्रशासन या कोर्ट की मदद लें।


 बिहार में ऑनलाइन सुविधा

बिहार सरकार ने जमीन बंटवारे से जुड़े कई काम ऑनलाइन कर दिए हैं:

  • भू-जन शिकायत पोर्टल: https://biharbhumi.bihar.gov.in/BiharBhumi/

  • यहाँ आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं → जमीन का बंटवारा / दाखिल-खारिज से जुड़ी समस्याएँ।


 कोर्ट केस में किन याचिकाओं का इस्तेमाल होता है?

  • Partition Suit – जमीन का बंटवारा करवाने के लिए।

  • Declaration Suit – मालिकाना हक साबित करने के लिए।

  • Injunction Suit – सामने वाले को कब्जा/निर्माण से रोकने के लिए।

  • Stay Order – केस चलने तक यथास्थिति बनाए रखने के लिए।


 मदद कहाँ से लें?

  • CSC केंद्र – आवेदन और ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए।

  • राजस्व कार्यालय – दाखिल-खारिज और सीमांकन के लिए।

  • वकील – विवाद या कोर्ट केस की स्थिति में।

  • हेल्पलाइन नंबर – राज्य सरकार समय-समय पर जारी करती है।


सारांश (Quick Recap)

  • वारिसों की पहचान करें।

  • सीमांकन कराएँ।

  • आपसी सहमति बनाएँ और लिखित करें।

  • रजिस्ट्री ऑफिस में Partition Deed रजिस्टर्ड कराएँ।

  • दाखिल-खारिज (Mutation) से रिकॉर्ड अपडेट कराएँ।

  • विवाद की स्थिति में → सिविल कोर्ट जाएँ।


 Partition Suit, जमीन बंटवारा बिहार

जमीन का बंटवारा सही तरीके से करना भविष्य की शांति और रिश्तों की मजबूती के लिए ज़रूरी है।
अगर आप कदम-दर-कदम प्रक्रिया अपनाएँ तो बिना तनाव के यह काम आसानी से पूरा हो सकता है।

👉 याद रखें:
बिना लिखित दस्तावेज़ और रजिस्ट्री के किया गया बंटवारा भविष्य में विवाद का कारण बन सकता है।

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FAQ (Frequently Asked Questions)

Q1. जमीन का बंटवारा करने का सबसे आसान तरीका क्या है?

👉 आपसी सहमति से बंटवारा सबसे आसान है। इसके बाद Partition Deed को रजिस्ट्री ऑफिस में रजिस्टर्ड कराना ज़रूरी है।

Q2. जमीन बंटवारे के लिए किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है?

👉 खतियान, नक्शा, लगान रसीद, पहचान पत्र, वंशावली प्रमाण पत्र, और मृत्यु प्रमाण पत्र (यदि मालिक की मृत्यु हो चुकी है)।

Q3. दाखिल-खारिज (Mutation) कब होता है?

👉 रजिस्ट्री या कोर्ट आदेश के बाद Circle Office में दाखिल-खारिज करवाया जाता है ताकि नए वारिसों के नाम रिकॉर्ड में जुड़ सकें।

Q4. अगर परिवार में आपसी सहमति न बने तो क्या करें?

👉 ऐसी स्थिति में सिविल कोर्ट में Partition Suit दायर करें। कोर्ट आदेश के बाद राजस्व विभाग रिकॉर्ड अपडेट करता है।

Q5. क्या जमीन का बंटवारा ऑनलाइन भी हो सकता है?

👉 हाँ, बिहार समेत कई राज्यों में ऑनलाइन भू-जन शिकायत पोर्टल और Mutation सेवाएँ उपलब्ध हैं।

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