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EV चार्जिंग पायलट प्रोजेक्ट्स: अब चार्जिंग होगी आसान और सस्ती भी

एक पार्किंग क्षेत्र में कई इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन से जुड़े हुए हैं, जिसमें विभिन्न मॉडल के सफेद, नीले और हरे रंग के वाहन शामिल हैं। पृष्ठभूमि में शहर की इमारतें और हरे पेड़ दिखाई देते हैं, जो एक साफ-सुथरे और पर्यावरण-अनुकूल वातावरण को दर्शाते हैं।
EV चार्जिंग पायलट प्रोजेक्ट्स 

सरकारी या निजी चार्जिंग पायलट प्रोजेक्ट्स के तहत” छूट मिल रही है, तो उसका मतलब होता है — ऐसे खास प्रोग्राम या स्कीमें, जिन्हें सरकार या निजी कंपनियाँ मिलकर परीक्षण के तौर पर चला रही होती हैं ताकि EV चार्जिंग को आसान, सस्ता और आम आदमी के लिए सुलभ बनाया जा सके।


चार्जिंग पायलट प्रोजेक्ट क्या होता है?

जब कोई सरकार या कंपनी किसी नए सिस्टम या सेवा को लॉन्च करने से पहले जांच के तौर पर सीमित जगहों पर लागू करती है, तो उसे पायलट प्रोजेक्ट कहा जाता है।
EV चार्जिंग को लेकर भी कई पायलट प्रोजेक्ट पूरे देश में चल रहे हैं।


सरकारी पायलट प्रोजेक्ट्स – सरकार खुद उतर रही है मैदान में

सरकार ने कई शहरों और छोटे कस्बों में EV चार्जिंग स्टेशनों को लगाने की शुरुआत की है — जैसे:

  • दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, भोपाल, लखनऊ, अहमदाबाद जैसे शहरों में

  • पेट्रोल पंपों पर या मेट्रो स्टेशन, बस अड्डों, मॉल्स जैसी जगहों पर

इन जगहों पर:

  • कुछ समय के लिए चार्जिंग एकदम फ्री होती है

  • या बहुत कम दरों पर दी जाती है, जैसे ₹1.5 – ₹3 प्रति यूनिट

ये सुविधा खासकर उन लोगों के लिए होती है जो नए-नए EV खरीद रहे हैं और जिनके पास घर पर चार्जिंग का विकल्प नहीं है।


निजी पायलट प्रोजेक्ट्स – प्राइवेट कंपनियाँ भी बढ़ा रही हैं कदम

कुछ बड़ी कंपनियाँ जैसे:

  • Tata Power EV

  • Reliance Jio BP

  • Ather Energy

  • ChargeZone

  • Fortum, Statiq, Exicom आदि

ये कंपनियाँ अपने प्राइवेट चार्जिंग स्टेशन सेट कर रही हैं, और शुरुआत में ग्राहकों को लुभाने के लिए:

  • पहले 3 महीने चार्जिंग फ्री

  • या ऐप से बुकिंग पर 50% डिस्काउंट

  • सब्सक्रिप्शन पर ₹500 फ्री चार्जिंग क्रेडिट

जैसे ऑफर देती हैं।


सरकार + निजी कंपनियाँ = साझेदारी का फायदा

कुछ पायलट प्रोजेक्ट्स तो PPP (Public-Private Partnership) के तहत चलते हैं, जहाँ:

  • ज़मीन सरकार देती है

  • स्टेशन कंपनी लगाती है

  • और आम लोग सस्ते दाम पर चार्ज कर पाते हैं

👉 ये मॉडल आने वाले समय में छोटे शहरों और गांवों तक ले जाया जा रहा है।


उदाहरण:

  1. दिल्ली में NDMC के तहत कई चार्जिंग स्टेशन फ्री में चालू किए गए हैं।

  2. बेंगलुरु में BESCOM + Ather का प्रोजेक्ट चल रहा है – जहां ₹2/unit में चार्जिंग मिलती है।

  3. Uttar Pradesh और महाराष्ट्र में निजी कंपनियों ने टोल प्लाज़ा के पास फास्ट चार्जिंग स्टेशन लगाए हैं।


आप कैसे पता करें?

  • Google Map या Tata Power EV, Statiq, ChargeZone जैसे ऐप्स से नज़दीकी चार्जिंग स्टेशन खोजें

  • देखें: "पायलट स्टेशन", "Free Charging", "Discount Offer" जैसे टैग होते हैं

  • ज़्यादा जानकारी के लिए अपने शहर के नगर निगम या बिजली विभाग की वेबसाइट भी देखें


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FAQ (Frequently Asked Questions)

Q1. EV चार्जिंग पायलट प्रोजेक्ट्स क्या हैं?
👉 ये छोटे स्तर पर शुरू की गई EV चार्जिंग पहलें हैं, ताकि भविष्य में बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।

Q2. इन प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य क्या है?
👉 EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना और उपयोगकर्ताओं को सुविधा देना।

Q3. EV चार्जिंग पायलट प्रोजेक्ट्स कहाँ चल रहे हैं?
👉 दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई सहित कई बड़े शहरों में।

Q4. क्या सरकार EV चार्जिंग पायलट प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करती है?
👉 हाँ, सरकार सब्सिडी, भूमि आवंटन और नीतियों से इन्हें बढ़ावा देती है।

Q5. इससे EV उपयोगकर्ताओं को क्या फायदा होगा?
👉 आसान चार्जिंग, समय की बचत और EV को अपनाने में बढ़ावा।

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