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कुपोषण मुक्ति कार्यक्रम – छत्तीसगढ़ की पोषण क्रांति

कुपोषित बच्चों की एक तस्वीर, जिसमें कई बच्चे एक साथ खड़े हैं,

कुपोषण मुक्ति कार्यक्रम (पोषण सुधार अभियान) – छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ सरकार का कुपोषण मुक्ति कार्यक्रम बच्चों और माताओं को पोषण सुरक्षा देता है। 

✅ परिचय

  • छत्तीसगढ़ में कुपोषण को कम करने हेतु “कुपोषण मुक्तি अभियान” यानी पोषण सुधार कार्यक्रम चलाया जा रहा है। (cgwcd.gov.in)

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य है 0-5 वर्ष के बच्चों, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं में पोषण स्तर सुधारना।

  • इसे मुख्यमंत्री सुपोषण योजना जैसे अन्य पहल के साथ संयोजित करके लागू किया गया है।


 प्रमुख लक्ष्य

  • बच्चों में कुपोषण (स्टंटिंग, वेस्टिंग, अंडरवेट) को घटाना। 

  • माताओं-गर्भवती महिलाओं का पोषण स्तर सुधारना।

  • आंगनवाड़ी केन्द्रों (AWC) द्वारा नियमित वजन-माप जैसे “वजन त्योहार” संचालन। 

  • पोषण-संबंधी जागरूकता, भोजन-मेन्यू सुधार व स्थानीय खाद्य-संसाधनों का उपयोग बढ़ाना।


 मुख्य क्रियाएँ – टास्क लिस्ट

  1. पंचायत/आंगनवाड़ी-स्तर पर सर्वे करें
     - 0-5 वर्ष के बच्चों की स्थिति जाँचे (वजन-उम्र, ऊँचाई-उम्र)। 

  2. वजन-माप आयोजन (“वजन त्योहार”) करें
     - सभी बच्चों का मासिक/त्रैमासिक माप कर ग्रोथ चार्ट अपडेट करें। 

  3. माताओं एवं गर्भवती महिलाओं का पोषण-सत्र चलाएं
     - आयरन, फोलिक एसिड, प्रोटीन-युक्त आहार पर जानकारी दें।

  4. स्थानीय खाद्य-संसाधनों को शामिल करें
     - हरी सब्जियाँ, दालें, दूध, अंडा, गुड़, मुनगा आदि दैनिक मेन्यू में शामिल करें।

  5. तत्काल पहचान व सुधार-कार्रवाई करें
     - यदि कोई बच्चा गंभीर कुपोषित पाया जाए, उसे तत्काल आंगनवाड़ी अथवा स्वास्थ्य केंद्र से जोड़ें।

  6. मॉनिटरिंग-डेटा जमा करें
     - माप-डेटा को जिलेवार विभाग को रिपोर्ट करें ताकि सतत निगरानी हो सके।

  7. समुदाय-सक्रियता बढ़ाएं
     - माताओं, युवाओं, स्वयं-सहायता समूहों को अभियान में शामिल करें ताकि पोषण-जागरूकता स्थानिक स्तर तक जाए।


 लाभ-बिंदु

  • बच्चों का विकास बेहतर होगा — मोटे-अभाव, हाइट में वृद्धि और रोग-प्रतिरोधक क्षमता में सुधार।

  • माताओं की स्वास्थ्य-स्थिति व पोषण-स्थिति मजबूत होगी — गर्भावस्था/सेवनावल में जोखिम कम होगा।

  • परिवार-स्तर पर खाद्य-वित्तीय भार कम हो सकता है क्योंकि पोषण-जागरूकता से खर्च-संतुलन बेहतर होगा।

  • समाज में पोषण की समस्या पर सार्वजनिक ध्यान आएगा — जिससे दीर्घकालीन परिवर्तन संभव होगा।


 पात्रता एवं कौन-लाभान्वित हो सकते हैं

  • 0-5 वर्ष के बच्चों वाले परिवार।

  • गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएं।

  • आंगनवाड़ी-केंद्रों एवं स्वास्थ्य-केंद्रों से जुड़े समुदाय।

  • विशेष रूप से निर्धन व दूरस्थ क्षेत्र-परिवार जहाँ पोषण-समस्याएँ अधिक हैं।


 

सुझाव एवं ध्यान देने योग्य बातें

  • नियमित रूप से बच्चों की वृद्धि मापें — बंद नहीं होने दें।

  • पोषण-कार्ड और ग्रोथ चार्ट को संज्ञान में रखें।

  • स्थानीय खाद्य-सूत्रों का अधिकतम उपयोग करें, महँगे पैकेज्ड फूड की बजाय।

  • माताओं को समझाएँ कि सिर्फ खाना नहीं, सही खाना कितना महत्वपूर्ण है।

  • यदि बच्चों या माताओं में कोई गंभीर समस्या दिखे — तुरंत स्वास्थ्य-केंद्र से संपर्क करें।

  • समुदाय-सक्रियता महत्वपूर्ण है — हमारे आसपास के लोग, स्वयं-सहायता समूह, शिक्षक, आंगनवाड़ी-कार्यकर्ता सभी सहयोग कर सकते हैं।

  • योजना के तहत रिकॉर्ड-रखने और डेटा-अपलोड करने में ध्यान दें — इससे बजट व संसाधन बेहतर मिलेंगे।


 वर्तमान स्थिति एवं प्रगति

  • राज्य में 2012 में कुपोषण की दर लगभग 40.87 % थी; 2014 में 32.9 % तक घट गई। 

  • “वजन त्योहार”-कैम्पेन ने कई जिलों में 90 % से ऊपर कवरेज देखा। 

  • 2019-20 के दौरान मुख्यमंत्री सुपोषण योजना तहत कुपोषित बच्चों की संख्या कम हुई। 

  • बावजूद इसके, कुछ जिलों में आंगनवाड़ी केन्द्रों की स्थिति व मापन-प्रक्रिया कमजोर पाई गई है। 


 निष्कर्ष

  • कुपोषण मुक्ति कार्यक्रम सिर्फ एक योजना नहीं — यह जीवन-परिवर्तन की दिशा है।

  • यदि आप आंगनवाड़ी-माताएँ, या मातृ-गृह की जिम्मेदार हैं — तो इस अभियान को अपनाएँ, सक्रिय बनें।

  • बच्चों की सेहत, माताओं की शक्ति, परिवारों की खुशहाली — सब इस पहल से जुड़ी हुई हैं।

  • हमारी छोटी-सी सक्रियता-त्याग से एक स्वस्थ-छत्तीसगढ़ का निर्माण संभव है।

  • “सही पोषण आज, स्वस्थ भविष्य कल” — यही हमारी साझी जिम्मेदारी है।


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FAQs (5 प्रश्न-उत्तर)

Q1. कुपोषण मुक्ति कार्यक्रम क्या है?
यह छत्तीसगढ़ सरकार की पहल है जो 0-5 वर्ष के बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण घटाने के लिए चल रही है।

Q2. इस योजना का संचालन कौन करता है?
महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इसे आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से लागू किया जाता है।

Q3. लाभ किसे मिलता है?
बच्चों, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को जो कुपोषण के जोखिम में हैं।

Q4. क्या इस योजना में आहार या सप्लीमेंट दिए जाते हैं?
हाँ, पौष्टिक आहार, अंडा, दूध, दाल, फल और आयरन-फोलिक टैबलेट जैसी सामग्री दी जाती है।

Q5. इस अभियान से अब तक क्या असर हुआ है?
राज्य में कुपोषण दर 2012 के 40.87% से घटकर 32.9% तक आई है और कई जिलों में बच्चों की सेहत में सुधार देखा गया है।

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