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पूर्वजों की संपत्ति में बंटवारा कैसे करें? पूरी जानकारी हिंदी में

एक परिवार के सदस्य एक मेज के चारों ओर बैठे हैं और एक बड़े नक्शे पर पूर्वजों की संपत्ति को बांटने की योजना बना रहे हैं। नक्शे पर हरे-भरे खेत और भूमि के विभिन्न हिस्से दिखाई दे रहे हैं। कमरे में पुरानी तस्वीरें और किताबें सजी हुई हैं, जो पारिवारिक विरासत को दर्शाती हैं।
पूर्वजों की संपत्ति का बंटवारा

पूर्वजों की संपत्ति में बंटवारा कैसे करें?


 प्रस्तावना

  • भारत में परिवार और रिश्ते संपत्ति से गहराई से जुड़े होते हैं।

  • जब बात पूर्वजों की संपत्ति (Ancestral Property) की आती है, तो अक्सर विवाद, गलतफहमियां और कानूनी झंझट सामने आ जाते हैं।

  • असली सवाल यह है कि – “पूर्वजों की जमीन या घर को न्यायपूर्ण तरीके से कैसे बांटा जाए ताकि रिश्ते भी बने रहें और अधिकार भी सुरक्षित रहें?”

  • आइए इसे स्टेप-बाय-स्टेप आसान भाषा में समझें।


 स्टेप 1: समझें – पूर्वजों की संपत्ति क्या है?

  • पूर्वजों की संपत्ति वह होती है जो कम से कम चार पीढ़ियों से चली आ रही हो।

  • इसका मतलब:

    • परदादा (Great Grandfather) से मिली संपत्ति = Ancestral Property

    • दादा-पिता से सीधे मिली संपत्ति भी इसमें गिनी जाती है।

  • मुख्य बात: यह स्वयं कमाई हुई संपत्ति (Self-acquired Property) से अलग होती है।


 स्टेप 2: कौन-कौन वारिस होते हैं?

  • हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act, 1956) के अनुसार, वारिसों की लिस्ट साफ है।

  • Class I Heirs में आते हैं:

    • बेटा और बेटी (दोनों को बराबर हक)

    • पत्नी (Widow)

    • मां (Mother)

    • पुत्र के बच्चे (अगर पुत्र जीवित न हो)

  • महत्वपूर्ण बदलाव (2005 संशोधन): अब बेटियों को भी बेटों के बराबर हक है।


 स्टेप 3: दस्तावेज़ और सबूत इकट्ठा करें

  • सही बंटवारे के लिए जरूरी है कि सबसे पहले कागज़ात साफ हों।

  • ज़रूरी दस्तावेज़:

    • खतियान/खसरा/जमाबंदी (भूमि रिकॉर्ड)

    • रजिस्ट्री या डीड

    • नक्शा और सीमांकन रिपोर्ट

    • पारिवारिक वंशावली (Family Tree/पारिवारिक पेडिग्री)

  • याद रखें: कागज मजबूत होंगे तो विवाद की संभावना कम होगी।


 स्टेप 4: पारिवारिक मीटिंग करें

  • संपत्ति का बंटवारा पहले परिवार में बैठकर तय करना सबसे बेहतर तरीका है।

  • इसके फायदे:

    • आपसी संवाद बना रहता है।

    • कोर्ट-कचहरी का खर्च बचता है।

    • रिश्ते टूटने से बचते हैं।

  • एक निष्पक्ष बुजुर्ग या गांव/सोसाइटी के पंच को भी mediator बनाया जा सकता है।


 स्टेप 5: बंटवारे के तरीके समझें

संपत्ति बांटने के मुख्य तरीके ये हैं:

1. आपसी सहमति से बंटवारा (Family Settlement)

  • सब लोग बैठकर लिखित समझौता कर लें।

  • इस समझौते को स्टांप पेपर पर लिखकर रजिस्टर्ड करवाना बेहतर है।

  • फायदे: सस्ता, जल्दी और विवाद रहित।

2. Partition Deed (बंटवारा डीड)

  • यह एक कानूनी दस्तावेज है, जिसमें हिस्सेदारी साफ लिखी जाती है।

  • इसे रजिस्ट्री ऑफिस में पंजीकृत (Registered) करवाना जरूरी है।

3. कोर्ट से बंटवारा (Partition Suit)

  • अगर परिवार में सहमति न बने तो कोर्ट में केस करना पड़ता है।

  • अदालत संपत्ति का कानूनी बंटवारा (Judicial Partition) करती है।

  • इसमें समय और पैसा ज्यादा लगता है, इसलिए इसे आखिरी विकल्प मानें।


 स्टेप 6: हिस्सेदारी कैसे तय होती है?

  • पूर्वजों की संपत्ति में सभी वारिस बराबर हिस्से के हकदार होते हैं।

  • उदाहरण:

    • अगर दादा की जमीन है और उनके दो बेटे और एक बेटी है → तीनों को बराबर हिस्सा मिलेगा।

    • अगर किसी की मृत्यु हो गई है तो उसका हिस्सा उसके बच्चों/पत्नी को मिलेगा।


 स्टेप 7: जमीन का भौतिक बंटवारा (Physical Partition)

  • केवल कागजों में नाम दर्ज होना काफी नहीं है।

  • जमीन का फील्ड लेवल पर सीमांकन (Demarcation) कराना जरूरी है।

  • इसमें पटवारी/राजस्व अधिकारी का रोल अहम होता है।

  • नक्शे में साफ-साफ दिखाया जाए कि किसका प्लॉट कहां है।


 स्टेप 8: बंटवारे के बाद नामांतरण (Mutation)

  • हिस्सेदारी तय हो जाने के बाद हर वारिस को अपने नाम पर Mutation (नामांतरण) करवाना होगा।

  • यह काम तहसील या नगर निगम के रिकार्ड ऑफिस में होता है।

  • इसके बाद बिजली, पानी, कर (Taxes) आदि भी अलग-अलग नाम पर हो जाते हैं।


 स्टेप 9: विवाद कम करने के सुझाव

  • बातचीत और पारदर्शिता बनाए रखें।

  • सभी दस्तावेज साझा करें, किसी से छुपाएं नहीं।

  • अगर कोई वारिस बाहर (विदेश/अन्य शहर) में है, तो उसे भी जानकारी दें।

  • Mediator या वकील को शामिल करें ताकि निष्पक्षता बनी रहे।


 स्टेप 10: कब वकील की मदद जरूरी है?

  • अगर संपत्ति बहुत बड़ी है।

  • अगर परिवार में आपसी विश्वास नहीं है।

  • अगर दस्तावेज अधूरे हैं।

  • अगर कोई वारिस बंटवारे से इंकार कर रहा है।
    👉 ऐसे मामलों में सिविल वकील (Property Lawyer) से सलाह लें।


 संपत्ति बंटवारे

  • संपत्ति बंटवारे का असली मकसद सिर्फ जमीन या घर को बांटना नहीं है, बल्कि रिश्तों में न्याय और समानता लाना है।

  • कई बार देखा जाता है कि भाई-बहनों में छोटी-छोटी बातों पर दुश्मनी हो जाती है, जबकि पैतृक घर की दीवारें यादों से भरी होती हैं।

  • इसलिए कोशिश करें कि प्यार और आपसी समझौते से बंटवारा हो, ताकि अगली पीढ़ी भी गर्व से उस विरासत को संभाल सके।


✅ एक्शन प्लान (संक्षेप में)

  1. पहचानें कि कौन सी संपत्ति पूर्वजों की है।

  2. सभी वारिसों की सूची बनाएं।

  3. कागज और जमीन के रिकॉर्ड इकट्ठा करें।

  4. पारिवारिक मीटिंग करके चर्चा करें।

  5. बंटवारे का तरीका चुनें (सहमति/डीड/कोर्ट)।

  6. हिस्सेदारी बराबरी से तय करें।

  7. सीमांकन कराएं और नक्शा बनवाएं।

  8. नामांतरण (Mutation) करवाएं।

  9. विवाद से बचने के लिए Mediator/वकील लें।

  10. रिश्तों को बचाए रखते हुए न्यायपूर्ण बंटवारा करें।


 पारिवारिक संपत्ति विवाद समाधान

पूर्वजों की संपत्ति का बंटवारा सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह परिवार के भविष्य की नींव है।
अगर इसे पारदर्शिता, आपसी सम्मान और समझदारी से किया जाए, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान बन सकता है।
लेकिन अगर इसे लालच या झगड़े में किया गया तो यही संपत्ति रिश्तों को तोड़ने का कारण भी बन सकती है।

👉 इसलिए सही समय पर, सही दस्तावेज़ों और सही सोच के साथ संपत्ति का बंटवारा करें – ताकि संपत्ति भी बचे और संबंध भी।

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✍️ लेखक: Progress India टीम

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 FAQ (Frequently Asked Questions)

Q1. पूर्वजों की संपत्ति किसे कहते हैं?
पूर्वजों की संपत्ति वह होती है जो कम से कम चार पीढ़ियों से चली आ रही हो, जैसे दादा या परदादा से मिली जमीन।

Q2. पूर्वजों की संपत्ति में बेटियों का हक है क्या?
हां, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के संशोधन के बाद बेटियों को भी बेटों के बराबर हक मिलता है।

Q3. पूर्वजों की संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है?
बंटवारा आपसी सहमति, Partition Deed, या कोर्ट केस के जरिए हो सकता है।

Q4. अगर परिवार में सहमति न बने तो क्या करें?
ऐसे में वकील की मदद लेकर सिविल कोर्ट में Partition Suit दाखिल करना पड़ता है।

Q5. क्या Mutation करवाना जरूरी है?
हां, बंटवारे के बाद जमीन या संपत्ति का नामांतरण (Mutation) जरूरी है, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में सही मालिक का नाम दर्ज हो सके।

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