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सतत जीविकोपार्जन योजना – अत्यंत गरीब परिवारों को स्थायी आजीविका की ओर ले जाने की पहल

सतत जीविकोपार्जन योजना बिहार के तहत एक समारोह में लोग मिट्टी के ढेर के चारों ओर एकत्रित होकर योजना की शुरुआत का प्रतीकात्मक रूप से उत्सव मना रहे हैं। एक वक्ता मंच पर भाषण दे रहा है, जबकि अन्य लोग मिलजुल कर कार्य कर रहे हैं।

सतत जीविकोपार्जन योजना (Sustainable Livelihood Scheme) – बिहार सरकार


 योजना का परिचय

  • बिहार सरकार ने गरीब और वंचित वर्ग के परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सतत जीविकोपार्जन योजना शुरू की।

  • इस योजना का उद्देश्य है –

    • परिवारों की स्थायी आय सुनिश्चित करना।

    • गरीबों को कर्ज़ और बेरोज़गारी के जाल से निकालना।

    • महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती देना।


 योजना क्यों ज़रूरी है?

  • बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जो अब भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन जी रहे हैं।

  • रोज़गार की स्थायी व्यवस्था न होने से लोग मज़दूरी या पलायन पर निर्भर रहते हैं।

  • सतत जीविकोपार्जन योजना उन्हें अपने गांव और घर में ही स्थायी काम और आमदनी का रास्ता देती है।


 योजना के मुख्य उद्देश्य

✔️ हर परिवार को नियमित आमदनी का साधन उपलब्ध कराना।
✔️ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोज़गार और छोटे उद्योग को बढ़ावा देना।
✔️ परिवारों को सिर्फ मदद नहीं, बल्कि लंबे समय तक जीविकोपार्जन का आधार देना।
✔️ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर सामाजिक समानता सुनिश्चित करना।


 योजना से कौन लाभ उठा सकता है?

  • बिहार के गरीब और कमजोर वर्ग के परिवार

  • महिला स्व-सहायता समूह (SHGs) से जुड़े परिवार।

  • ऐसे परिवार जिनके पास स्थायी रोजगार का साधन नहीं है

  • समाज के वंचित वर्ग जैसे – अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर लोग।


 योजना के अंतर्गत क्या मदद मिलती है?

  1. ✅ परिवार को व्यवसाय या स्वरोज़गार शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता

  2. ✅ महिलाओं को समूह में जोड़कर आर्थिक सहयोग और प्रशिक्षण

  3. कृषि, पशुपालन, लघु उद्योग जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर।

  4. ✅ सरकार और विभिन्न विभागों से मिलने वाले लोन और अनुदान की सुविधा

  5. ✅ SHG के माध्यम से बैंक लिंकेज, ताकि परिवार ब्याज रहित या कम ब्याज पर ऋण ले सकें।


 योजना कैसे काम करती है?

  • चरण 1 – लाभार्थी परिवार की पहचान पंचायत और ब्लॉक स्तर पर की जाती है।

  • चरण 2 – चयनित परिवार को SHG से जोड़ा जाता है।

  • चरण 3 – उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता दी जाती है।

  • चरण 4 – परिवार को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार रोजगार चुनने का अवसर।

  • चरण 5 – लगातार मॉनिटरिंग, ताकि काम लंबे समय तक चलता रहे और आय स्थिर बनी रहे


 किन-किन क्षेत्रों में मिल सकते हैं अवसर?

  • कृषि आधारित कार्य – सब्ज़ी उत्पादन, बागवानी, जैविक खेती।

  • पशुपालन – मुर्गी, बकरी, गाय पालन।

  • छोटे व्यवसाय – सिलाई-कढ़ाई, अगरबत्ती बनाना, फर्नीचर।

  • लघु उद्योग – खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी यूनिट, हस्तशिल्प।

  • सेवाएं – साइकिल मरम्मत, मोबाइल रिपेयरिंग, दुकानदारी।


 आवेदन प्रक्रिया (सरल स्टेप्स में)

  1.  नज़दीकी पंचायत या ब्लॉक कार्यालय से संपर्क करें।

  2.  आवश्यक दस्तावेज़ जमा करें –

    • पहचान पत्र (आधार/मतदाता कार्ड)

    • परिवार विवरण

    • आय प्रमाण पत्र

    • बैंक पासबुक

  3.  आवेदन पत्र भरें और SHG या पंचायत से सत्यापन करवाएं।

  4. ✅ चयन होने पर परिवार को योजना से जोड़ा जाएगा।


 योजना में महिलाओं की भूमिका

  • महिलाओं को स्व-सहायता समूह से जोड़कर नेतृत्व और आर्थिक स्वतंत्रता दी जाती है।

  • समूह के जरिए महिलाएं छोटे-छोटे लोन लेकर व्यवसाय शुरू करती हैं।

  • इससे वे सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की आर्थिक ताकत बनती हैं।


 योजना के फायदे (लाभार्थियों के नजरिए से)

  • अब परिवारों को सिर्फ मजदूरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

  • गांव में ही रोजगार मिलने से पलायन कम होता है

  • छोटे व्यवसाय शुरू करने से नियमित आमदनी आती है।

  • महिलाएं घर की चारदीवारी से निकलकर आत्मनिर्भर और सशक्त बन रही हैं।

  • बच्चों की पढ़ाई और परिवार की ज़रूरतें आसानी से पूरी हो पा रही हैं।


 "अब हर परिवार बनेगा आत्मनिर्भर – सतत जीविकोपार्जन योजना, बिहार सरकार"

कल्पना कीजिए –

  • एक गरीब किसान परिवार जिसकी आय सिर्फ खेत की मज़दूरी से होती थी।

  • सतत जीविकोपार्जन योजना से परिवार की महिला ने मुर्गी पालन यूनिट शुरू की।

  • धीरे-धीरे गांव की और महिलाओं को भी जोड़ा, अब सबकी आमदनी दोगुनी हो चुकी है।
    👉 यही इस योजना का असली मकसद है – गरीब से आत्मनिर्भर बनने का सफर


 चुनौतियाँ और समाधान

  • ❌ सभी परिवार तक योजना की जानकारी नहीं पहुंच पाती।

  • ❌ शुरुआती दौर में पूंजी और प्रशिक्षण की कमी।

  • ❌ बाजार तक पहुंच और उत्पाद बेचने की दिक्कत।

✅ समाधान:

  • गांव-गांव में जागरूकता अभियान

  • नियमित ट्रेनिंग और मार्गदर्शन

  • सरकार की मदद से मार्केट कनेक्शन और सप्लाई चैन


 योजना का असर – बदलाव की दिशा

  • हजारों परिवारों ने इस योजना से रोजगार पाया।

  • महिलाएं अब निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल हो रही हैं।

  • गांवों में स्थायी आजीविका के मॉडल विकसित हो रहे हैं।

  • गरीबी घट रही है और लोगों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है


 भविष्य की संभावनाएँ

  • हर पंचायत में स्थायी जीविकोपार्जन केंद्र की स्थापना।

  • युवाओं को जोड़कर स्टार्टअप और आधुनिक रोजगार की ओर बढ़ना।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़कर उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री


✅ "सतत जीविकोपार्जन योजना – बिहार के गरीब परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता की राह"

सतत जीविकोपार्जन योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं है, बल्कि यह गरीबी से बाहर निकलने का रास्ता है।
यह योजना लोगों को मदद के बजाय काम करने का अवसर देती है।
👉 यही कारण है कि इसे बिहार की सबसे प्रभावी सामाजिक-आर्थिक पहल माना जा रहा है।

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✍️ तैयार किया गया – Progress India के लिए


FAQ (Frequently Asked Questions)

Q1. सतत जीविकोपार्जन योजना क्या है?
यह बिहार सरकार की एक स्कीम है जिसका उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्ग के परिवारों को स्थायी रोजगार और आय का साधन उपलब्ध कराना है।

Q2. इस योजना का लाभ किन्हें मिलेगा?
गरीब, वंचित, महिला स्व-सहायता समूह (SHGs) से जुड़े परिवार, अनुसूचित जाति/जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग।

Q3. योजना के तहत क्या मदद मिलती है?
व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, बैंक लोन, पशुपालन, कृषि और छोटे उद्योगों में रोजगार के अवसर।

Q4. आवेदन कैसे करें?
नज़दीकी पंचायत या ब्लॉक कार्यालय से संपर्क करें, आवश्यक दस्तावेज़ जमा करें और SHG के माध्यम से आवेदन करें।

Q5. इस योजना में महिलाओं की क्या भूमिका है?
महिलाओं को SHG से जोड़कर लोन, प्रशिक्षण और नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जाती है, जिससे वे आत्मनिर्भर और सशक्त बनती हैं।

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